Interstate: सरहदों के उस पार बुना जाल, अब भोपाल में खुलेंगी ज़ुर्म की गांठें, PHQ से SIT उतरी मैदान मे!
Interstate: सरहदों के उस पार बुना जाल, अब भोपाल में खुलेंगी ज़ुर्म की गांठें, PHQ से SIT उतरी मैदान मे!
Anam Ibrahim
Journalist
7771851163
```अशोकनगर, इंदौर, खरगोन और भोपाल में पनाह लेने वाले रिकॉर्डसुदा इंटरस्टेट घुसपैठियों पर शिकंजा PHQ की सीधी निगरानी, चप्पे चप्पे पर खुफिया तलाश शुरू।
इंटरस्टेट जुर्म का जाल होगा बेनक़ाब, SIT की पनाह देने वालों तक पहुंचेगी जांच
इंटरस्टेट गैंग ही नहीं, उन्हें छुपाने वाले भी SIT के निशाने पर```
BBC_OF_INDIA
Bhopal/Mp: ख़बर PHQ से.....
*भोपाल/मप्र:* जुर्म जब सरहद पार करता है, तो वो सिर्फ रास्ता नहीं बदलता वो ठिकाने भी ढूंढता है, चेहरे भी और अक्सर ऐसे दरवाज़े भी, जो बाहर से बंद और अंदर से खुले होते हैं।
मध्यप्रदेश में अब उन्हीं दरवाज़ों पर दस्तक शुरू हो चुकी है।
ज़नाब
कहते हैं जुर्म कभी अकेला नहीं चलता उसके पाँव होते हैं, रास्ते होते हैं और अक्सर उसे रास्ता दिखाने वाले भी होते हैं। मध्यप्रदेश के कई जिलों में फैली वारदातों की यही बिखरी कड़ियाँ अब एक ही धागे में पिरोने की कोशिश शुरू हुई है। नाम वो ही पुराना दिया गया है SIT। मगर जनाब, असली कहानी इस नाम के पीछे छिपी है।
भोपाल के पुलिस मुख्यालय से एक आदेश निकला है सादा कागज़, स्याही भी वही पुरानी लेकिन मिज़ाज बदला हुआ। कहा गया है कि अब अशोकनगर, इंदौर (शहर और देहात) खरगोन और भोपाल में दर्ज संगीन अपराधों की तफ्तीश एक ही छत के नीचे होगी। वजह? तो लाज़मी है
क्योंकि शक है कि ये वारदातें अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही सिलसिले की कड़ियाँ हैं एक ऐसा जाल, जो राज्य की सरहदों से नहीं, सिस्टम की खामोशियों से मजबूत होता है।
इस जाल को काटने के लिए बनाई गई है Special Investigation Team SIT।
नाम में जितनी सादगी है, काम उतना ही पेचीदा।इस बार STF, ATS और रेलवे पुलिस के अफसर यानी हर वो आंख जो अब तक अलग-अलग कोनों से देख रही थी, अब एक ही दिशा में घूरेगी।
कागज़ कहता है त्वरित और गहन विवेचना होगी।
ज़मीनी तर्जुमा ये है
अब फाइलें सिर्फ बंद नहीं होंगी, खुलेंगी भी और शायद बोलेंगी भी।
SIT की कमान भोपाल में बैठे अफसरों के हाथ में होगी। केस डायरी अलग-अलग जिलों से उठाकर एक जगह जमा की जाएंगी जैसे बिखरे हुए राज़ों को एक कमरे में बंद कर दिया गया हो, ताकि कोई एक दरवाज़ा खुले और सब बाहर आ जाए।
सवाल ये नहीं कि गिरोह हैं
सवाल ये है कि इतने दिन तक ये इंटरस्टेट खेल चलता कैसे रहा?
क्या ये सिर्फ अपराधियों की चालाकी थी
या कहीं न कहीं वो खामोश दरवाज़े भी थे, जो वक्त आने पर खुल जाते हैं और बंद भी?
क्योंकि जनाब,
जुर्म जब सरहद पार करता है, तो अक्सर अकेला नहीं जाता।
आगे की तस्वीर:
पुलिस कहती है Zero Tolerance।
और हर बार ये जुमला अच्छा लगता है सुनने में सख्त, कागज़ पर मजबूत।
लेकिन असली इम्तिहान अब शुरू होता है
जब SIT सिर्फ अपराधियों तक पहुंचे या रास्ते में पड़ने वाले हर साये को भी पहचान ले!
क्योंकि कहानी सिर्फ गिरोह की नहीं है
कहानी उस खामोशी की भी है,
जिसने उन्हें इतना बड़ा होने दिया।
अशोकनगर से इंदौर, खरगोन से भोपाल फाइलों में दबे ‘इंटरस्टेट गिरोह’ के किस्से अब तफ्तीश की आग में तपेंगे कौन शिकारी, कौन शिकार पर्दा उठना अभी बाकी है।
जल्द पढ़े मप्र मे बाहरी बदमाशों को पनाह देने वाले घर के भेदीयों के नामजद खुलासे.....
तबतक होशियार रहें या बेपरवाह
इस पुलिसया मरकज़ के ख़ास लश्कर के खैमे मे....
कार्रवाई की कमान पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के सख्त मार्गदर्शन में , अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (STF) की निगरानी में गठित SIT संभाल रही है। टीम की अगुवाई कर रहे हैं DIG/एसपी (रेल) भोपाल राहुल कुमार लोढ़ा, साथ में STF भोपाल के एसपी राजेश सिंह भदौरिया, STF इंदौर के एसपी नवीन कुमार चौधरी, ATS भोपाल के एसपी वैभव श्रीवास्तव, AIG (रेडियो) सुधीर कनोजिया, डीएसपी सूर्याकांत अवस्थी, डीएसपी दिव्या सिंह राजावत, कार्यवाहक डीएसपी महेन्द्र सिंह चौहान और योगिता साटनकर यानि हर वो नाम, जो अब फाइलों में नहीं,सीधे मैदान में जवाब लिखेगा।
admin