Indore: ज़हर का Startup, Easy Money का Funeral MD Drugs और एक शहर की पेशानी पर कालिख
Anam Ibrahim
Journalist 007
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Ps खज़राना
इंदौर कोई नशे का अड्डा नहीं था उसे बनाया जा रहा है।
Star चौराहे की सर्विस रोड पर कोई शायर नहीं खड़ा था, कोई मज़दूर नहीं बस एक चलता फिरता ज़हर खड़ा हुआ था। जेब में MD Drugs, आँखों में easy money और दिमाग़ में वो बेहूदा सपना कि सब चलता है।
पुलिस दिखी तो पाँव काँपे।
क्योंकि जो कारोबार अँधेरे में पनपता है, वो रौशनी से डरता है।
BBC-OF-INDIA
पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के साफ़ आदेश थे की Indore को Narcotics-free बनाना है।
और इस बार आदेश काग़ज़ नहीं बने, कार्रवाई बने।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित सिंह, DCP कुमार प्रतीक, ADCP अमरेंद्र सिंह और ACP कुंदन मंडलोई की निगरानी में थाना ख़जराना की टीम ने उस सोच को दबोच लिया जो कहती है नशा भी धंधा है।
थाना प्रभारी मनोज सिंह सेंधव की टीम ने जब घेराबंदी की, तो भागता हुआ शख़्स सिर्फ़ आरोपी नहीं था वो उस समाज की बदहवासी था जो shortcut success पर ताली बजाता है।
नाम निकला मोहम्मद लियाक़त ख़ान, उम्र 45।
12वीं पास। कॉस्मेटिक की दुकान।
यानी आइना बेचने वाला खुद अंधा हो चुका था।
तलाशी में मिला
18 ग्राम से ज़्यादा MD Drugs
क़ीमत ₹1,80,000 से ऊपर
इतना ज़हर कि दर्जनों घरों में मातम बिछ जाए।
पूछताछ में जो निकला, वो और गंदा था
ख़ुद नशे का आदी, और अमीर बनने की हड़बड़ी।
Buy cheap, सेल कॉस्टली इंसान नहीं, मौत की मार्केटिंग।
समस्या गुनहगार नहीं, वो तालियाँ हैं जो उसे सुनाई देती हैं।
लालच हिंसा का सबसे सभ्य चेहरा है। जब समाज पूछना बंद कर दे, अपराध जवाब बन जाता है। है बस कि हर एक उनसे पूछे क़ीमत क्या है इस नशे की?”
थाना ख़जराना में अपराध क्रमांक 20/26, धारा 8/22 NDPS Act में केस दर्ज।
अब पुलिस आरोपी से source और network उधेड़ेगी क्योंकि ये एक आदमी नहीं, एक सिस्टम है जो नौजवानों की नसों में ज़हर डालकर मुनाफ़ा गिनता है।
इस कार्रवाई में अनिल गौतम, संदीप पटेल, दिनेश सरगईया, मोहन पाटीदार, अनिल ओझा, पंकज सांवरिया, जबर सिंह धाकड़ और प्रदीप सूर्यवंशी की भूमिका सिर्फ़ सराहनीय नहीं ज़रूरी थी।
आख़िरी बात (जो चुभेगी):
MD Drugs कोई फ़ैशन नहीं, Funeral Invitation है।
जो आज भाई का माल कहकर बिकता है, वो कल माँ की चीख़ बनता है।
क़ानून ने आज एक को पकड़ा है
कल समाज को अपनी चुप्पी पकड़नी होगी।
ये ख़बर नहीं, इत्तेहाम है।
अगर बुरा लगे तो समझो असर हुआ।Indore: ज़हर का Startup, Easy Money का Funeral MD Drugs और एक शहर की पेशानी पर कालिख
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