983 नए आरक्षकों की दस्तक से और मजबूत हुई मध्यप्रदेश पुलिस, डीजीपी ने याद दिलाया वर्दी ताकत नहीं, जवाबदेही का नाम है!
इंदौर 983 नई वर्दियों की कदमताल, डीजीपी का पैगाम जनता का भरोसा ही पुलिस की असली ताकत!!
983 नए आरक्षकों की दस्तक से और मजबूत हुई मध्यप्रदेश पुलिस, डीजीपी ने याद दिलाया वर्दी ताकत नहीं, जवाबदेही का नाम है!
Anam Ibrahim
Journalist
7771851163
ख़बर PHQ से..........
इंदौर पीटीसी की 78वीं दीक्षांत परेड में 787 महिला समेत 983 नव आरक्षक मुख्यधारा में शामिल, साइबर अपराध, नशे और सिंहस्थ-2028 की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश!
BBC_OF-INDIA
Jansampark Life
Indore/Bhopal/Mp: इंदौर देशभक्ति, अनुशासन और जनसेवा के जज़्बे से लबरेज़ 983 नव आरक्षकों ने मंगलवार को पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी) इंदौर की 78वीं दीक्षांत परेड के साथ मध्यप्रदेश पुलिस की मुख्यधारा में कदम रखा। लगभग एक साल की सख्त तरबियत के बाद पासिंग आउट परेड में 787 महिला और 196 पुरुष आरक्षकों ने अनुशासन, दक्षता और आत्मविश्वास का ऐसा मुज़ाहिरा किया जिसने मौजूद अफसरों, अभिभावकों और मेहमानों को रोमांचित कर दिया।
समारोह के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने परेड की सलामी लेने के बाद नव आरक्षकों को संबोधित करते हुए साफ कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी ताकत उसके हथियार या कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि जनता का भरोसा है। उन्होंने कहा कि थाने की चौखट पर पहुंचने वाला पीड़ित इंसाफ के साथ संवेदनशील व्यवहार की भी उम्मीद लेकर आता है और यही भरोसा पुलिस की असली पूंजी है।
डीजीपी ने बदलते अपराधी मिज़ाज की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आज मुजरिम मोबाइल, सोशल मीडिया, डेटा और डिजिटल तकनीक के सहारे नए-नए तौर-तरीके अपना रहे हैं। ऐसे दौर में पुलिसकर्मी का सिर्फ शारीरिक रूप से फिट होना काफी नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष, मानसिक रूप से संतुलित और नैतिक रूप से मजबूत होना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने नव आरक्षकों को याद दिलाया कि वर्दी अधिकार से ज्यादा जिम्मेदारी का पैगाम देती है और उसकी असली इज़्ज़त पहनने वाले के किरदार और व्यवहार से तय होती है।
अपने संबोधन में डीजीपी ने साइबर अपराध और नशे को समाज के सामने खड़ी दो बड़ी चुनौतियां बताया। उन्होंने 'नशे से दूरी है जरूरी' अभियान का जिक्र करते हुए नव आरक्षकों से इस सामाजिक मुहिम को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही सिंहस्थ-2028 को मध्यप्रदेश पुलिस की अगली बड़ी परीक्षा बताते हुए सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और तकनीकी समन्वय में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय की पुलिस अधीक्षक वाहनी सिंह ने बताया कि संस्थान को दो बार देश के सर्वश्रेष्ठ आरक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में सम्मानित किया जा चुका है और अब तक 27 हजार से अधिक आरक्षक यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर पुलिस सेवा में शामिल हो चुके हैं।
दीक्षांत समारोह से पहले आयोजित सांस्कृतिक संध्या में लोकमाता अहिल्याबाई के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति और रंगारंग कार्यक्रमों ने समां बांधा। इस अवसर पर डीजीपी ने संस्थान की स्मारिका ‘सांदीपनि स्मृति’ का विमोचन किया तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं, अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया। परेड के बाद नव आरक्षकों के ‘आरोहण’ कार्यक्रम में टीम भावना, साहस और समन्वय के हैरतअंगेज करतबों ने समारोह को यादगार बना दिया।
एक तरफ परेड मैदान में कदमताल गूंज रही थी, दूसरी तरफ मध्यप्रदेश पुलिस अपने भविष्य की नई फौज को जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता का सबक सौंप रही थी। यही संदेश पूरे समारोह का निचोड़ भी रहा कि बदलते दौर की पुलिस केवल कानून की रखवाली नहीं, बल्कि समाज के भरोसे की निगहबान भी है।
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