भोपाल की सड़कों पर उतरा कांग्रेसी महिलाओं का सियासी हुजूम,विपक्ष का मार्च या हुकूमत से सीधा सवाल: आरक्षण कब?

भोपाल की सड़कों पर उतरा कांग्रेसी महिलाओं का सियासी हुजूम,विपक्ष का मार्च या हुकूमत से सीधा सवाल: आरक्षण कब?

भोपाल की सड़कों पर उतरा कांग्रेसी महिलाओं का सियासी हुजूम,विपक्ष का मार्च या हुकूमत से सीधा सवाल: आरक्षण कब?

Anam Ibrahim 

Journalist 

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प्लेटिनम प्लाज़ा से रोशनपुरा तक गूंजे नारे.. महिला कांग्रेस, यूथ ब्रिगेड और कद्दावर नेताओं की मौजूदगी में विरोध सिर्फ रैली नहीं रही ये हुकूमत की नीयत के खिलाफ खुला इल्ज़ाम बन बन गई है ।

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ख़बर PCC कांग्रेस दफ़्तर से.......

विशेष विधानसभा सत्र मे आज ये भी ख़ास.....

भोपाल की सड़कों पर औरत का हक़ बनाम सत्ता का सन्नाटा 543 सीटों का सवाल, जवाब अब भी ‘वेटिंग लिस्ट’ में!

प्लेटिनम प्लाज़ा से रोशनपुरा तक चली भीड़ ने सिर्फ मार्च नहीं किया उसने हुकूमत की नीयत को कटघरे में खड़ा कर दिया। नारे कम थे, सवाल ज्यादा और हर सवाल की नोक पर था महिला आरक्षण अभी क्यों नहीं?

Bhopal/Mp: भोपाल विपक्ष की सियासत का रास्ता आज गवाह बना एक ऐसे पैदल मार्च का, जो पैरों से कम और सवालों से ज्यादा चला। प्लेटिनम प्लाज़ा से उठी ये सियासी आहट टीनशेड, टॉप एंड टाउन, न्यू मार्केट होते हुए रोशनपुरा चौराहा तक पहुंची और हर मोड़ पर बीजेपी सरकार की “महिला नीति” का पोस्टमार्टम करती गई।

ये मार्च मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी का था और मंच पर मौजूद थे जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, कांतिलाल भूरिया, फूल सिंह बरैया,आरिफ मसूद, आतिफ अकील, पी.सी. शर्मा, मुकेश नायक, कुणाल चौधरी, अवनीश भार्गव, रीना बौरासी, सुनीता पटेल, प्रवीण सक्सेना, अनोखी पटेल, यश घनघोरिया यानी सियासत का पूरा “कास्ट” हाजिर था, सियासत एक ही मोज़ू पे स्क्रिप्ट एक ही महिला आरक्षण।

*जीतू पटवारी* ने सीधा वार किया

“अगर नीयत साफ है, तो लोकसभा की 543 सीटों पर महिला आरक्षण अभी लागू करो और मध्यप्रदेश विधानसभा में भी प्रस्ताव पास करो।”

बात सीधी थी, मगर सियासत में सीधी बात अक्सर फाइलों के चक्कर में गोल हो जाती है।

उमंग सिंघार* ने तंज को थोड़ा और धारदार किया

“बीजेपी और आरएसएस महिलाओं के नाम पर सियासत करते हैं, पर असली आरक्षण देने में बचते हैं।

यानी “नारा आपका, हक़ हमारा ये कौन सा हिसाब है जनाब?i

महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी और पूर्व विधायक सुनीता पटेल ने भी अपनी आवाज़ जोड़ी उन्होंने कहा कि महिलाओं को “सिंबॉलिक नहीं, रियल पॉलिटिकल स्पेस” चाहिए बिना देरी, बिना बहाने।

अब कहानी का दूसरा पन्ना 

कांग्रेस ने याद दिलाया कि राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव, सोनिया गांधी के दौर में पंचायत और नगरी निकायों में महिला आरक्षण लागू हुआ।

मतलब “इतिहास हमारा, इम्तिहान तुम्हारा।”

मगर असली सवाल वही खड़ा है, जो पूरे मार्च में हवा में तैरता रहा

अगर विशेष विधानसभा सत्र बुलाया गया है, तो क्या ये सिर्फ रस्म-ए-अदायगी है?

या सच में कोई ऐसा फैसला आएगा, जो सियासत की मर्दाना दीवार में दरार डाल दे?

भोपाल की सड़कों ने आज जो देखा, वो सिर्फ भीड़ नहीं थी

वो एक खामोश डर भी था.. कि कहीं ये मुद्दा भी बाकी वादों की तरह “घोषणा” बनकर रह न जाए।

खैर ज़नाब ये तो रही कांग्रेस महिला मित्र मंडल की कारगुज़ारी लेकिन उधर भाजपा की अलग तैयारी पढ़िए जल्द 

चलिए क़्या होता है विशेष विधानसभा सत्र मे आज जल्द जानते हैं

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