25 मौतें कफ सिरप से, 35 इंदौर के पानी से, NICU में चूहे जीतू पटवारी का वार: ये हादसे नहीं, मप्र की बेजान होती हुकूमत का सिलसिला है
25 मौतें कफ सिरप से, 35 इंदौर के पानी से, NICU में चूहे जीतू पटवारी का वार: ये हादसे नहीं, मप्र की बेजान होती हुकूमत का सिलसिला है
Anam Ibrahim
Journalist
7771851163
NICU में ज़िंदगी की पहली जंग लड़ते नवजात और उनके सिरहाने चूहों का ख़ौफ़ हिफ़ाज़त की जगह ख़तरे का पहरा
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गिनाए तीन बड़े मामले दवा, पानी और अस्पताल.... हर जगह सिस्टम फेल, जिम्मेदारी तय नहीं*
BBC_OF_INDIA
ख़बर प्रदेश कांग्रेस दफ़्तर से............
Bhopal/Mp: भोपाल से जारी बयान में बवाल नहीं है, लेकिन आरोप भारी हैं और सवाल उससे भी ज्यादा।
जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में “लापरवाही का खतरनाक सिलसिला” चल रहा है और इसकी कीमत आम लोग जान देकर चुका रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने तीन घटनाओं का जिक्र किया
पहला, जहरीले कफ सिरप से करीब 25 लोगों की मौत, जिससे दवा नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
दूसरा, इंदौर में दूषित पानी से 35 से अधिक लोगों की मौत। आरोप है कि भारी बजट के बावजूद पेयजल व्यवस्था विफल रही और जिम्मेदारी से बचने के लिए मामले को भटकाने की कोशिश हुई।
तीसरा, एम्स भोपाल के NICU में चूहों की मौजूदगी जहां नवजातों का इलाज होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह गंभीर संक्रमण का खतरा पैदा करता है क्योंकि नवजातों की प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है।
पटवारी ने कहा कि यह पहली बार नहीं है। पिछले साल इंदौर के MY अस्पताल में चूहों के काटने से दो नवजातों की मौत हुई थी, जिस पर कोर्ट ने कार्रवाई भी की थी लेकिन हालात नहीं बदले।
उन्होंने आरोप लगाया कि हर मामले में एक जैसा पैटर्न है
दवा नियंत्रण में लापरवाही, पानी की व्यवस्था में विफलता, अस्पतालों में साफ-सफाई और पेस्ट कंट्रोल की कमी, शिकायतों पर देर से कार्रवाई और सबसे अहम जवाबदेही का अभाव।
पटवारी ने सवाल उठाया
“क्या जनता की जान इतनी सस्ती हो गई है कि बार-बार ऐसी घटनाओं के बाद भी ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे?”
साथ ही मांग की गई कि इन मामलों में जल्द और सख्त कार्रवाई हो और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए।
इस खबर में नया कुछ नहीं है
सिवाय इसके कि तीन अलग-अलग घटनाएं अब एक ही कहानी बताने लगी हैं।
हादसे वारदाते लापरवाही कुछ भी हो सियासत
हल निकालने की जगह एक दूसरे की खाल उधेड़ने का हादसे को मुद्दा बना तमाशा खड़ा कर ही देती है हमदर्दी, तसल्ली देना और दवा,दाना दावत देना ये अलग बात है
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