भोपाल से उठा ले गया 16 साल की मासूम चार महीने तक ‘मोहब्बत’ के नाम पर चलता रहा अपहरण का काला सफ़र!

भोपाल से उठा ले गया 16 साल की मासूम चार महीने तक ‘मोहब्बत’ के नाम पर चलता रहा अपहरण का काला सफ़र!

भोपाल से उठा ले गया 16 साल की मासूम चार महीने तक ‘मोहब्बत’ के नाम पर चलता रहा अपहरण का काला सफ़र!

Anam Ibrahim 

Journalist_007

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भोपाल के थाना गांधी नगर से अगवा 16 साल की नाबालिग को 4 महीने तक शहर-दर-शहर छिपाकर घुमाता रहा हवस का भूखा भेड़िया, आख़िरकार नरसिंहगढ़ में SIT ने तोड़ी हवस भरी फरारी!

          जनसम्पर्क Life

          BBC_OF_INDIA 

Bhopal/Mp: थाना गाँधी नगर चार महीने तक नाबालिग़ के जिश्म को चबाता रहा एक हवस का भेड़िया और भोपाल ‘इश्क़’ समझकर जिस कहानी को पढ़ता रहा, वो दरअसल एक नाबालिग की लूटी हुई उम्र थी! जी हां.....गांधी नगर की 16 साल की बच्ची को बहला फुसलाकर ले गया कमलेश अहिरवार बैंगलोर, गुजरात, इंदौर और नरसिंहगढ़ की गलियों में हवस की तरह भटकती रही फरारी; आखिर SIT ने उस चेहरे को पकड़ लिया जिसने मोहब्बत के नाम पर बचपन को कैद कर रखा था।

कसम गद्दारन की.... ये भोपाल बड़ा अजीब शहर है साहब!

यहाँ तालाबों में पानी कम और किस्सों में धुआँ ज़्यादा तैरता है।

दिन में सभ्यता सूट पहनकर घूमती है और रात होते ही कई चेहरे अपनी असली खाल पहन लेते हैं।

बहरहाल 15 जनवरी 2026 की तारीख़ भी ऐसी ही एक रात की राख से निकली थी।

गांधी नगर की एक 16 साल की लड़की अचानक ग़ायब हो गई।

घरवालों ने पहले रिश्तेदारों को फोन लगाए!! फिर पड़ोसियों के दरवाज़े खटखटाए!! फिर आख़िर में थाने पहुँचे!!!

क्योंकि हिंदुस्तान में जब कोई बेटी गुम होती है, तो घर वाले पहले उसे खुद ढूँढते हैं पुलिस को तो बाद में बुलाते हैं।

उन्हें डर होता है कहीं समाज सवाल न पूछ ले।

क्योंकि इस मुल्क में लड़की के गायब होने पर शक़ अक्सर गुनहगार पर नहीं, लड़की की परवरिश पर किया जाता है।

चुनाँचे थाने में अपराध दर्ज हुआ धारा 137(2) BNS।

काग़ज़ पर मामला छोटा था।

मगर असलियत में वो एक माँ के कलेजे पर रखा पत्थर था।

जाँच आगे बढ़ी तो एक नाम सामने आया कमलेश अहिरवार।

उम्र 22 साल।

बंजारा बस्ती, अब्बास नगर, गांधी नगर भोपाल।

नाम मामूली था

मगर उसका खेल ख़तरनाक निकला।

उसने लड़की को सिर्फ़ भगाया नहीं था बल्कि 

वो उसे अपने साथ शहर-दर-शहर ऐसे घसीटता रहा जैसे कोई शिकारी घायल हिरनी को जंगलों में घुमाता है ताकि उसकी चीख़ किसी आबादी तक न पहुँच सके।

इंदौर!

बैंगलोर!!

अहमदाबाद!!!

नरसिंहगढ़!!!!

हर शहर में एक नया कमरा।

हर कमरे में एक नया झूठ।

और हर झूठ के नीचे दबी हुई एक नाबालिग की सिसकियों भरी चीख़।

कमलेश मोबाइल बंद कर चुका था।

रिश्तों से कट चुका था।

वो जानता था कि इस मुल्क में लड़की की तलाश से पहले लोग उसकी “मर्ज़ी” पर बहस करने लगते हैं।

यही इस समाज की सबसे बड़ी बीमारी है यहाँ अपराधी बाद में पकड़ में आता है, पहले लड़की के चरित्र का पोस्टमार्टम होता है।

उधर पुलिस फाइलों में लड़की “व्यपहृता” लिखी जा रही थी

और इधर एक माँ रात को दरवाज़ा आधा खुला छोड़ देती थी।

शायद बेटी लौट आए।

शायद कोई ऑटो रुके।

शायद कोई आवाज़ आए “अम्मी दरवाज़ा खोलो”

मगर लौटती थीं सिर्फ़ सन्नाटे की आहटें।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर SIT बनाई गई।

सैकड़ों मोबाइल नंबरों की CDR खंगाली गई।

CCTV फुटेजों में भागती परछाइयों को रोका गया।

मध्यप्रदेश से गुजरात तक पुलिस की टीमें धूल फाँकती रहीं।

क्योंकि अब मामला सिर्फ़ एक लड़की का नहीं था 

मामला उस दरिंदगी का था जो मोहब्बत का नक़ाब पहनकर नाबालिग ज़िंदगियों को निगल जाती है।

और फिर 

22 मई 2026।

तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर की सूचना ने उस फरारी की गर्दन पकड़ ली जो खुद को बहुत चालाक समझ रही थी।

नरसिंहगढ़, जिला राजगढ़ से नाबालिग बालिका को आरोपी कमलेश अहिरवार के कब्ज़े से दस्तयाब कर लिया गया।

चार महीने बाद।

चार महीने 

सिर्फ़ कैलेंडर के चार पन्ने नहीं होते साहब।

चार महीने में एक लड़की का बचपन बूढ़ा हो जाता है।

एक माँ की आँखें पत्थर हो जाती हैं।

और एक बाप भीतर ही भीतर मरने लगता है।

आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

अब पुलिस उन लोगों की तलाश में है जिन्होंने इस फरारी के दौरान उसकी मदद की।

क्योंकि ऐसे अपराध अकेले नहीं चलते इनके पीछे कुछ बंद दरवाज़े, कुछ किराए की ख़ामोशियाँ और कुछ बिके हुए ज़मीर हमेशा खड़े रहते हैं।

इस कार्रवाई में सहायक पुलिस आयुक्त निशातपुरा अक्षय चौधरी, थाना प्रभारी विजेन्द्र मर्सकोले, उनि अयाज़ चाँदा, सउनि लक्ष्मी देवी, टेक्निकल सेल और थाना गांधी नगर की टीम की भूमिका सराहनीय रही।

और शहर?

शहर अब भी वही है।

चौराहों पर भीड़ है।

मोबाइलों में रील्स हैं।

राजनीति में भाषण हैं।

बस कहीं एक लड़की अब शायद आईने से नज़रें मिलाने से डरती होगी 

और एक माँ ने चार महीने बाद पहली बार अपने घर की कुंडी अंदर से बंद की होगी।

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