इंदौर से बीजेपी का ‘कैडर क्रांति’ ऐलान: ट्रेनिंग के तीर से संगठन की धार तेज, विचारधारा के दम पर सियासत में फिर कब्ज़े की तैयारी
इंदौर से बीजेपी का ‘कैडर क्रांति’ ऐलान: ट्रेनिंग के तीर से संगठन की धार तेज, विचारधारा के दम पर सियासत में फिर कब्ज़े की तैयारी
Anam Ibrahim
Journalist
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दीनदयाल की राह पर ‘कैडर का साम्राज्य’: इंदौर से बीजेपी का बिगुल ट्रेनिंग की तपिश में ढलकर ही सत्ता पर निर्णायक दस्तक
ट्रेनिंग से ताक़त, कैडर से कब्ज़ा: इंदौर में बीजेपी ने सियासी मशीन को फिर से ‘रीलोड’ किया
वर्कशॉप नहीं, ‘विचारधारा की फैक्ट्री’ जहाँ कार्यकर्ता गढ़े जा रहे हैं, सरकार का पैग़ाम जन-जन तक पहुंचाने के लिए तैयार
BBC_OF_INDIA
ख़बर BJP दफ़्तर से.............
Bhopal/Indore/Mp:
इंदौर सत्ता के खैमे में लगी मजलिश इस बार सियासत सिर्फ बोली नहीं गई गढ़ी गई। पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के मंच से बीजेपी ने साफ़ कर दिया कि उसकी राजनीति का असल ज़ेवर नारे नहीं, बल्कि निखरे हुए कैडर हैं जो विचारधारा भी ढोते हैं और सत्ता की राह भी बनाते हैं।
जी हां
पश्चिम मध्य क्षेत्र की इस अहम कार्यशाला में पार्टी के दिग्गजों ने एक सुर में जो पैग़ाम दिया, उसका लब्बोलुआब यही रहा “बीजेपी की ताक़त कुर्सी नहीं, कार्यकर्ता है।”
राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने संगठन की बुनियाद को कैडर की सोच, क्षमता और समर्पण से जोड़ते हुए साफ़ किया कि पार्टी का असली ढांचा नीचे से ऊपर बनता है। उनका लहजा इशारा कर रहा था कि बीजेपी अपने कार्यकर्ताओं को सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि सियासी कारीगर बनाना चाहती है जो हर हाल में विचारधारा का झंडा बुलंद रखे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस सियासी तर्ज़ को सरकार के कामकाज से जोड़ते हुए कहा कि कार्यकर्ता ही वह पुल है, जो सत्ता और समाज के बीच खड़ा है। उन्होंने साफ़ किया कि ट्रेनिंग सिर्फ संगठनात्मक औपचारिकता नहीं, बल्कि पॉलिटिकल पॉलिश है जिससे कार्यकर्ता सरकार की योजनाओं को जन-जन तक असरदार अंदाज़ में पहुंचा सके। साथ ही, उन्होंने विपक्ष पर बिना नाम लिए तंज कसते हुए यह भी जता दिया कि कुछ दल यहां सिर्फ चुनावी शतरंज खेलते हैं, वहीं बीजेपी “राष्ट्र प्रथम” के उसूल पर सियासत करती है।
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने प्रशिक्षण को पार्टी की रीढ़ बताते हुए कहा कि विचारधारा तभी जिंदा रहती है, जब उसे समझने और समझाने वाले कार्यकर्ता मजबूत हों। उनके मुताबिक यह महाअभियान कार्यकर्ताओं को सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि एक मुकम्मल सियासी पहचान देने की कवायद है ताकि संगठन का हर चेहरा, पार्टी की सोच का आईना बन सके।
वहीं पूर्व सांसद डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने इस पूरी प्रक्रिया को संवाद की निरंतर रवायत करार देते हुए कहा कि विचारधारा पर टिके रहना ही बीजेपी की सबसे बड़ी सियासी पहचान है। उनका दावा था कि यही वह फ़र्क है, जो पार्टी को महज़ चुनावी जमातों से अलग करता है।
इस पूरे सियासी जमावड़े में बार-बार एक बात उभरकर सामने आई बीजेपी अब अपनी राजनीति को इवेंट से आगे ले जाकर इंस्टीट्यूशन में तब्दील करने की कोशिश में है, जहाँ हर कार्यकर्ता एक प्रशिक्षित संदेशवाहक हो, हर बूथ एक मजबूत इकाई और हर इलाका विचारधारा का विस्तार।
अंजाम:
इंदौर की इस कार्यशाला ने यह साफ़ कर दिया कि बीजेपी की अगली सियासी चाल नारेबाज़ी से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित कैडर की क़तारों से चलेगी जहाँ हर कार्यकर्ता सिर्फ समर्थक नहीं, बल्कि चलता-फिरता संगठन होगा।
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