जाम के कटघरे में ज़िंदगी PHQ की दस्तक, CM का संकल्प आख़िर कब टूटेगा नशे का साम्राज्य?

जाम के कटघरे में ज़िंदगी PHQ की दस्तक, CM का संकल्प आख़िर कब टूटेगा नशे का साम्राज्य?

जाम के कटघरे में ज़िंदगी PHQ की दस्तक, CM का संकल्प आख़िर कब टूटेगा नशे का साम्राज्य?

Anam Ibrahim

Journalist

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नशे की अदालत में हर रोज़ उम्रकैद पा रहे रिश्ते, PHQ ने बजाया बिगुल, CM भी उतरे मुहिम में

प्रदेशभर में 1300 से अधिक कार्यक्रमों के ज़रिए 9 लाख लोगों तक पहुँचा नशामुक्ति का संदेश। पुलिस की पुकार जाम नहीं, ज़िंदगी चुनिए।

1300 से ज़्यादा जागरूकता कार्यक्रमों के बीच एक तल्ख़ पैग़ाम शराब और नशा कभी दोस्त नहीं, फ़ौजदारी की फ़ाइल, अस्पताल का बिस्तर और उजड़े घर का सबसे ख़ामोश गवाह हैं।

    BBC_OF_INDIA

Bhopal/Mp: भोपाल, 20 जुलाई।

बोतल जब होंठों तक पहुँचती है तो अक्सर अक़्ल जेब में चली जाती है। फिर सड़कें अदालत बनती हैं, थाने मेहमानख़ाना और अस्पताल आख़िरी पड़ाव। नशा पहले इंसान को बहकाता है, फिर घर को महकाने का झूठा सपना दिखाकर बर्बाद कर देता है। शायद इसी सच को समाज की रगों तक पहुँचाने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस ने "नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" अभियान के पाँचवें दिन प्रदेशभर में 1300 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर 9 लाख से ज़्यादा नागरिकों तक यह संदेश पहुँचाया कि असली नशा जीवन है, ज़हर नहीं।

रैलियाँ निकलीं, नुक्कड़ नाटक हुए, मैराथन दौड़ी, जागरूकता रथ गाँव-गाँव पहुँचे, चौपालों में संवाद हुआ, स्कूलों में शपथ दिलाई गई और सोशल मीडिया तक यह आवाज़ पहुँची कि नशा किसी मर्दानगी, आधुनिकता या शौक़ का नाम नहीं, बल्कि परिवार, सेहत, सम्मान और क़ानून चारों का एक साथ जनाज़ा निकालने का रास्ता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्रिमंडल ने भी भोपाल देहात के जगदीशपुर (चमन महल) में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान अभियान का समर्थन करते हुए नशामुक्त मध्यप्रदेश का संकल्प लिया और हस्ताक्षर अभियान में भागीदारी की।

प्रदेश के अलीराजपुर, खंडवा, ग्वालियर, बालाघाट, मंडला, खरगोन और उज्जैन समेत अनेक जिलों में छात्रावासों, हाट-बाज़ारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, औद्योगिक क्षेत्रों, झुग्गी बस्तियों और ग्रामीण इलाक़ों तक पुलिस पहुँची। कहीं निमाड़ी बोली में गीत गूँजे, कहीं नुक्कड़ नाटक हुए, कहीं ऑटो-ई-रिक्शा पर संदेश चस्पा किए गए, तो कहीं नशे की गिरफ़्त में फँसे लोगों और उनके परिवारों को पुनर्वास केंद्रों की जानकारी देकर नई शुरुआत का रास्ता दिखाया गया।

यह अभियान सिर्फ़ समझाइश नहीं, समाज से पूछा गया एक तीखा सवाल भी है आख़िर शराब की बोतल में ऐसा क्या है कि आदमी अपनी औलाद की मुस्कान, माँ-बाप की दुआ और अपने भविष्य से बड़ा उसे समझ बैठता है? नशे का कारोबार जेब भरता है, मगर घर खाली कर देता है। इसलिए पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ख़ुद नशे से दूर रहें, दूसरों को भी बचाएँ और अवैध नशे के कारोबार की सूचना देकर समाज को इस धीमे ज़हर से मुक्त कराने में अपनी भूमिका निभाएँ।