हबीबगंज में रात का घातक घेरा,डिलीवरी बॉय से ‘लूट एंड रन’ का खेल फेल!!
हबीबगंज में रात का घातक घेरा,डिलीवरी बॉय से ‘लूट एंड रन’ का खेल फेल!!
Anam Ibrahim
Journalist
7771851163
Ps हबीबगंज.....
12 नम्बर स्टॉप से E-7 तक मचा हड़कंप; मारपीट कर मोबाइल छीना, नाकेबंदी में चंद मिनटों में धराए दो बदमाश और एक नाबालिग!!!
BBC_OF_INDIA
Jansampark_Life
अख़बार की दुनियां मे बेबाक़ी का सबसे बड़ा कलेजा......
Bhopal/Mp/भोपाल/मप्र:
रात का कोई मज़हब नहीं होता ज़नाब। वह अमीर की कोठी पर भी उतरती है और उन लड़कों के कंधों पर भी, जो पेट के लिए आधी रात तक डिलीवरी करता करते फिरते हैं ।
भोपाल की उस रात में भी कुछ ऐसा ही था। सड़क वही थी, स्ट्रीट लाइटें वही थीं, हवा भी वही थी जो हर रात बहती है। फर्क सिर्फ इतना था कि उस रात तीन लुटेरों के चेहरे अंधेरे को अपना साथी समझ बैठे थे।
इधर संजू ठाकुर अपनी मोटरसाइकिल पर था। किसी का ऑर्डर पहुंचाना था। किसी घर में शायद खाना उसका इंतज़ार कर रहा था। मगर E-7 की तरफ मुड़ते ही तीन परछाइयाँ उसके सामने अचानक आ खड़ी हुईं। पहले रास्ता रुका, फिर शब्द रुके, फिर हाथ चले।
कुछ सेकंड की झूमाझटकी में एक मोबाइल फोन हाथ बदल चुका था।
क्राइम की दुनिया में इसे बड़ी वारदात नहीं कहा जाएगा। न कोई करोड़ों की डकैती, न गोलियों की तड़तड़ाहट, न खून से रंगी सड़क। लेकिन जुर्म की असल औकात रकम से नहीं, नीयत से नापी जाती है। और यहाँ नीयत साफ थी किसी मेहनतकश को आसान शिकार समझ लेने की नीयत।
तीन लूटेरे राह चलते डिलीवरी बॉय के साथ लूट कर
भागे।
शायद उन्हें लगा होगा कि रात उनकी हमराज़ है। मगर रात कभी किसी की नहीं होती।
कुछ ही दूरी पर पुलिस की चेकिंग चल रही थी। हड़बड़ाया हुआ लूट की वारदात का शिकार युवक वहाँ पहुँचा और कहानी सुनाई। इसके बाद जो हुआ, वह किसी फिल्मी पीछा करने वाले दृश्य जैसा नहीं था। बस कानून ने अपने कदम तेज़ किए और अंधेरे ने अपने राज़ छुपाने से इंकार कर दिया।
घेराबंदी हुई।
सड़कें छोटी पड़ गईं।
रास्ते बंद हो गए।
और थोड़ी ही देर बाद वे चेहरे पुलिस के सामने खड़े थे जो कुछ मिनट पहले खुद को बाज़ीगर समझ रहे थे।
बहरहाल आरोपी आशीष कनाड़े के पास से वही मोबाइल बरामद हुआ, जिसके लिए पूरी वारदात हुई थी। उसके साथ ब्रजेश कनाड़े और एक विधि-विरोधी बालक भी पकड़ा गया।
कसम गद्दारन की....
फौजदारी दुनिया का एक दिलचस्प सच है बदमाश अक्सर वारदात की तैयारी करते हैं, गिरफ्तारी की नहीं।
उन्हें लगता है कि शिकार की घबराहट उनकी सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन कई बार कानून की सबसे बड़ी ताकत उसकी मौजूदगी नहीं, उसकी अचानक मौजूदगी होती है।
उस रात भी यही हुआ।
एक मोबाइल फोन लूटने निकले लोग शायद यह सोच रहे थे कि वे किसी गरीब लड़के की जेब से उसकी चीज़ छीन रहे हैं। मगर उन्हें पता नहीं था कि वे अपनी आज़ादी भी उसी जेब में डाल रहे हैं।
सुबह होने तक मोबाइल अपने मालिक के पास था।
और लुटेरे पुलिस की फाइल में।
गिरफ्तारी की गिरह में बंधे चेहरे
पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों की पहचान हबीबगंज निवासी 45 वर्षीय आशीष कनाड़े और 21 वर्षीय ब्रजेश कनाड़े के रूप में हुई है, जबकि वारदात में शामिल एक विधि-विरोधी बालक को भी अभिरक्षा में लिया गया है। जिस सड़क पर यह लूट शुरू हुई थी, उसका आख़िरी सिरा आखिरकार थाने के रोजनामचे तक पहुंचा।
किसने तोड़ी फरारी की ज़ंजीर
इस कार्रवाई के पीछे थाना हबीबगंज और थाना चूनाभट्टी की संयुक्त पुलिस टीम की मुस्तैदी रही। थाना प्रभारी निरीक्षक संजीव चौकसे और निरीक्षक धर्मेन्द्र मौर्य के नेतृत्व में उपनिरीक्षक अजय दुबे, प्रधान आरक्षक राजकुमार साहू, आरक्षक रामनरेश किरार, राकेश भारद्वाज, धर्मेन्द्र तथा रामसुभग ने घेराबंदी से लेकर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई को अंजाम दिया। रात की स्याही में छिपने निकले आरोपी शायद यह नहीं जानते थे कि उस रात कानून भी जाग रहा था।
admin