महाकाल के दर पर सत्ता नहीं, संकल्प झुका: ॐकार जप से ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व-2026’ की शुरुआत
Anam Ibrahim
Journalist 007
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महाकाल के साये में स्वाभिमान की शपथ: ॐकार, Politics और सनातन आत्मा की एक सुबह
BBC-OF-INDIA
उज्जैन की हवा ने शनिवार को ख़बर नहीं, गवाही लिखी।
भोर अभी पूरी तरह जागी भी नहीं थी कि बाबा महाकाल के दर पर एक नेता नहीं, एक श्रद्धालु खड़ा था
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल।
जी हां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से शुरू हुए ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व-2026’ के तहत यह हाज़िरी महज़ दर्शन नहीं थी। यह ॐकार मंत्र के साथ की गई वह शुरुआत थी, जहाँ शब्द ख़ामोश थे और आस्था बोल रही थी
मेरा बचपन का दोस्त ज़हूर कहता तो लिख देता यह कोई Photo-op नहीं, यह अंदर की लड़ाई का इज़हार है।
और मैरे लड़कपन का दोस्त हासिम होता तो वो
जोड़ता जब सियासत ज़मीन पर उलझे, तब उसे आसमान की ज़रूरत पड़ती है।
और मुकेश सिंह की ज़ुबान कुछ इस तरह से होती में सजदा वही मुक़म्मल, जो इरादे को पाक कर दे।
महाकाल के चरणों में लिया गया संकल्प साफ़ था
सनातन स्वाभिमान की हिफ़ाज़त और शिवालयों की अखंडता।
ना स्लोगन, ना शोर बस एक ठहरा हुआ यक़ीन।
Punjabi लहज़े में कहें तो
एह कोई एलान नहीं, एह इम्तिहान है अपने आप दा।
और English में, सीधा और सख़्त
This was not about power. This was about purpose.
गाँधी अगर देखते, तो शायद इतना ही कहते
आस्था तब सच्ची होती है, जब वह अहंकार नहीं, आत्मसंयम पैदा करे।
यह तस्वीर महज़ एक फ्रेम नहीं।
यह उस भारत का बयान है, जहाँ महाकाल मौन हैं, मगर संदेश गूंज रहा है
स्वाभिमान न मांगा जाता है, बल्कि जिया जाता है।
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