इंदौर की रात में भटकती मासूम क्या मेले की भीड़ में बचपन इतना अकेला हो गया?

इंदौर की रात में भटकती मासूम क्या मेले की भीड़ में बचपन इतना अकेला हो गया?

इंदौर की रात में भटकती मासूम क्या मेले की भीड़ में बचपन इतना अकेला हो गया?

Anam Ibrahim 

Journalist007

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खिलौने बेचते माता-पिता से बिछड़ी बच्ची रास्ता भटकी, डायल-112 की FRV-44 ने तलाशकर अन्नपूर्णा थाने में सत्यापन के बाद परिजनों को सौंपा!

       BBC OF INDIA 

          

INDORE/MP: इंदौर हां वो रात तो गहरी थी, शहर भी अपनी रफ़्तार में दोपहर से ज़्यादा इजाफ़ा कर चूका था और इधर मेले की रोशनी में खिलौने बिक रहे थे। उसी भीड़ में एक मासूम बच्ची अपने माता-पिता से बिछड़कर रास्ता भटक गई। उम्र छोटी थी, रास्ते अनजान थे और रात करीब 10 से 11 बजे की थी। 

10 सितंबर 2026 की रात थाना द्वारकापुरी क्षेत्र में बालिका के गुम होने जैसी स्थिति में मिलने की सूचना जब डायल-112 पर पहुँची तो सूचना मिलते ही FRV-44 की एक पुलिस टीम मौके पर पहुँची और बच्ची को संरक्षण में लेकर आसपास उसके माता-पिता की तलाश शुरू की। पूछताछ और लगातार पड़ताल का सिलसिला चला तो मालूम हुआ कि बच्ची के माता-पिता पास के मैदान में लगे मेले में खिलौने बेच रहे हैं।

फिर क़्या था पुलिस टीम उन्हें तलाशकर अपने साथ थाना अन्नपूर्णा पहुँची। वहाँ वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आवश्यक जानकारी और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसके बाद मासूम को सकुशल उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया।

बच्ची के मिलते ही परिजनों की घबराहट जैसे एकाएक उतर गई। उन्होंने पुलिस टीम का शुक्रिया अदा किया। पुलिस ने भी परिजनों को समझाइश दी कि भविष्य में बच्ची को अकेला न छोड़ें।

मगर यह महज़ एक बच्ची के मिल जाने की कहानी नहीं। यह उस शहर से एक जिंदा सवाल भी है *मेले की चकाचौंध, रोज़गार की मजबूरी और भीड़ के बीच क्या हम अपने बच्चों पर उतनी ही निगाह रख पा रहे हैं, जितनी उनकी हिफ़ाज़त के लिए ज़रूरी है?*

कभी-कभी एक मासूम का रास्ता भटकना सिर्फ़ कुछ मिनटों की घबराहट नहीं होता; वह समाज की चौकसी, परिवार की मजबूरी और शहर की जिम्मेदारी तीनों का आईना बन जाता है।

ख़बर की खैरियत इसी मे है अनम की लापरवाही बरती जाए जुम्मेदारियों से और जवाबदारों को नसीहत कर दी जाए की जागते रहो बच्चो के इर्दगिर्द आँखों को खोलकर सोते रहो लेकिन निगाहों से ओजल न होने दो क्योंकि जरुरी नही की हर बार ख़ो चुके नन्हें फरिश्ते दोबारा मिल जाए,

सच बाज़ओक़ात मेले मासूमो को अक़्सर लील ही लेते है जो जो बाद मे जिन्दगी भर लापता नाम के कफ़न मे ज़िंदा दफन रह जाते है