रेलवे के ठेके का झांसा, भरोसे का क़त्ल: कटनी में इन्वेस्टमेंट की आड़ में 36 लाख डकार गया सफ़ेदपोश नटवरलाल!
रेलवे के ठेके का झांसा, भरोसे का क़त्ल: कटनी में इन्वेस्टमेंट की आड़ में 36 लाख डकार गया सफ़ेदपोश नटवरलाल!
#Anam_ibrahim
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रेलवे कॉन्ट्रेक्टर बनकर दौलत, रुतबे और सरकारी रसूख़ का ऐसा जाल बुना कि मेहनत की कमाई ख़ुद चलकर ठग की तिजोरी में उतरती रही… कटनी पुलिस ने पन्ना से दबोचकर नगद, लग्ज़री कार समेत 76 लाख से ज़्यादा की माली सल्तनत ज़ब्त की
BBC_OF_INDIA
ख़बर PHQ से................
Katni/Mp: कटनी। फ़रेब जब सूट-बूट पहन ले, तो वह जेबकतरा नहीं दिखाई देता साहब दिखाई देता है। उसकी ज़बान में मिठास होती है, लहज़े में सरकारी रौब, और आँखों में ऐसा भरोसा कि सामने वाला अपने पसीने की कमाई भी उसके कदमों में अमानत समझकर रख आए। कटनी में एक ऐसा ही सफ़ेदपोश नटवरलाल बेनक़ाब हुआ है, जिसने रेलवे में निवेश और ठेके दिलाने के नाम पर भरोसे की गर्दन दबाकर लाखों रुपये की जालसाज़ी कर डाली।
मुल्ज़िम ख़ुद को रेलवे का बड़ा कॉन्ट्रेक्टर बताता था। बातचीत में सरकारी दफ़्तरों की ख़ुशबू घोलता, फ़ाइलों और टेंडरों की ऐसी कहानियाँ सुनाता कि सुनने वाला ख़ुद को मुनाफ़े की पटरियों पर दौड़ता महसूस करने लगे। उसने फरियादी को यक़ीन दिलाया कि रेलवे से जुड़े कामों में रुपया लगाने पर ऊपर तक सेटिंग के ज़रिए मोटा फ़ायदा होगा।
यहीं से शुरू हुआ भरोसे के क़त्ल का वह खेल, जिसमें इंसान रुपया नहीं हारता अपनी अक्ल, अपना इत्मीनान और लोगों पर ऐतबार हार जाता है। मुल्ज़िम ने योजनाबद्ध अंदाज़ में फरियादी को अपने झांसे में लिया और छल-कपट से 36 लाख 30 हज़ार रुपये ऐंठ लिए।
कुछ वक़्त तक ख़्वाबों की रेल दौड़ती रही, मगर जब न ठेका मिला, न मुनाफ़ा, तब फरियादी को एहसास हुआ कि वह किसी कारोबारी के नहीं, बल्कि एक ऐसे मक्कार दिमाग़ के शिकंजे में था, जो भरोसे को चारा और लालच को हथियार बनाकर चलता है।
थाना एनकेजे में शिकायत पहुँचते ही पुलिस ने मामले को गंभीर माली जुर्म मानते हुए फ़ौरन मुक़दमा दर्ज किया। साइबर इनपुट, तकनीकी सुबूत और सतत निगरानी के ज़रिए पुलिस मुल्ज़िम तक पहुँची। उसकी लोकेशन पन्ना ज़िले में मिली, जहाँ पुलिस ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।
पूछताछ में मुल्ज़िम की अकड़ ज़्यादा देर क़ायम न रह सकी। पुलिसिया सवालों की धार के आगे उसने धोखाधड़ी का पूरा खेल उगल दिया। कार्रवाई के दौरान उसके क़ब्ज़े से 36 लाख 30 हज़ार रुपये नगद, वारदात में इस्तेमाल लग्ज़री वाहन और दूसरी क़ीमती संपत्तियाँ बरामद की गईं। ज़ब्त माल की कुल क़ीमत 76 लाख रुपये से ज़्यादा आँकी गई है।
यह सिर्फ़ एक एफआईआर नहीं, बल्कि उस बीमार लालच का दस्तावेज़ है जहाँ लोग जल्दी अमीर बनने की ख़्वाहिश में अपने होश गिरवी रख देते हैं। हर चमकता चेहरा कामयाबी नहीं होता, कई चेहरे दौलत की भूख में इंसानियत तक बेच चुके होते हैं।
कटनी पुलिस की यह कार्रवाई उन तमाम सफ़ेदपोश जालसाज़ों के लिए खुला पैग़ाम है की क़ानून की पकड़ भले देर से पहुँचे, मगर जब पहुँचती है तो नकली रसूख़, बनावटी हैसियत और फ़रेबी शानो-शौकत सबकी परतें उधेड़ देती है। बहरहाल धोकाधड़ी, जालशाजी हैराफेरी का करोबार राजधानी भोपाल मे भी कम नही जल्द पढ़े दिखावेदार दौलतमंदी के जाल मे जकड़ते युवाओं की कारगुज़ारी
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