18 रोज़ा सृजन: Society अभी ICU में, मगर Certificates बिल्कुल हेल्दी, पुलिस, NGO और प्रेस नोट ने मिलकर किया सामुदायिक दिलासा-ए-यज्ञ
Anam Ibrahim
7771851163
*Jabalpur/Mp:* जबलपुर में पुलिस और समाज ने मिलकर 18 दिनों तक ‘सृजन’ उगाने की कोशिश की। भले ही खेत वही था समाज का, और हल वही पुराना सिस्टम। बस इस बार Guidance imported था SP साहब का, और fertilizers में NGO भी मिला हुआ था। फिर नतीजा?
Press Note bumper, समाज minor improvement.
मंगल भवन, पनागर में एक ऐसा आयोजन हुआ जिसमें
Gender Equality, Legal Awareness, Self-Defence, Anti-Drugs, बाल विवाह रोकथाम तमाम
सब कुछ सिखाया गया
यानि बच्चों को वही सब सिखाया गया,
जो बड़ों ने आज तक सीखा ही नहीं है ।
बा मूलाहिजा और फिर Grand Finale में बच्चों ने Power Walk करके माँ, पुलिस, डॉक्टर, वकील, आर्मी, किसान, गांधी, अंबेडकर, भगत सिंह… सब बन-बन कर दिखाया।
एक पल को लगा
अगर ये बच्चे देश चलाएँ तो System शायद सुधर ही जाए।
फिर याद आया
ये तो स्टेज-वाला देश था, असली वाला तो बाहर खड़ा था, जूते मेंyh कंकड़ डालते हुए।
Certificates और Shields ऐसे उड़ रहे थे
जैसे समाज की सारी परेशानियाँ Xerox हो गई हों
और मूल copy कहीं रखी ही न हो।
NGO ने पुलिस को संविधान की प्रस्तावना दी,
पुलिस ने NGO को शील्ड दी
यानि विचार और धातु का Exchange Offer
और बीच में खड़ा समाज पूछ रहा था
“भाई, मेरे Share में क्या आया?
Awareness या बस फोटो में बैकग्राउंड बनने का मौका?”
हीना पीछे से मुस्कुराए
हमको मालूम है सृजन का असर क्या होगा,
फिलहाल तो headline ही इलाज है जनाब।
फिर अबू कान में फुसफुसाए
ये कार्यक्रम समाज सुधार कम,
और समाज को सुधरा-हुआ दिखाने का प्रयास ज़्यादा लगता है।
फिर अनम ने सिगरेट सुलगाई और कहा
सच इतना नंगा है कि उसे press-note ने दुपट्टा ओढ़ा दिया है।
और फिर वो बोली जी
अच्छा है, बच्चों को सीखने दो,
शायद वे हमारी गलतियाँ repeat न करें।
अंतिम सत्य
बच्चे मार्शल आर्ट सीख कर लौटे,
System आज भी फाइलें मार्शल तरीके से पलट रहा है।
पर उम्मीद अभी बाकी है
क्योंकि ये बच्चे जब बड़े होंगे
तो शायद Press-Note नहीं, सच लिखेंगे।
तब तक
Certificates खिलते रहें, समाज सोचता रहे,
और हम इस Circus की front row audience बने रहें।
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