इंदौर: "इनामी बाबा" की फरारी खत्म, 5000 के इनाम पर करोड़ों का खेल!

इंदौर: "इनामी बाबा" की फरारी खत्म, 5000 के इनाम पर करोड़ों का खेल!

Anam Ibrahim 

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*जनसम्पर्क Life*

न्यूज़ नेटवर्क 

इंदौर, क्राइम ब्रांच से ख़ास रिपोर्ट........

*इंदौर/मप्र:* पुलिस ने आखिरकार वो कारनामा कर दिखाया, जिसकी उम्मीद शायद खुद फरार आरोपी को भी नहीं थी। जी हां, हम बात कर रहे हैं ₹5,000 के इनामी मिलन गिरी की, जिनकी फरारी पुलिस के लिए किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म से कम नहीं थी। लेकिन आखिरकार, क्राइम ब्रांच के जाबांजों ने "लोधीपुरा के लुटेरे" को धर दबोचा।

*5000 की कीमत में करोड़ों का मास्टरमाइंड*

अब आप सोच रहे होंगे कि यह मिलन गिरी आखिर है कौन? तो सुनिए, ये जनाब किसी सस्ते स्कैमस्टर की तरह काम नहीं करते। 4 करोड़ 89 लाख की धोखाधड़ी करने के बाद, इन्होंने 5000 रुपए के इनाम पर अपना नाम लिखवा लिया। वाह! एक तरफ इनाम का आंकड़ा और दूसरी तरफ करोड़ों की ठगी। यह वाकई पुलिस के "बजट इनाम" सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

*मुखबिर ने तोड़ी फरारी की पटकथा*

मिलन गिरी को पकड़ने के लिए पुलिस ने कितने जतन किए, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आखिर मुखबिर ने ही इनकी लोकेशन का खुलासा किया। पुलिस ने बड़ी मेहनत से घेराबंदी कर इन्हें पकड़ा। मुखबिर की सूचना पर इस हाई-प्रोफाइल भगोड़े का अंत हुआ। जनता तो यही सोच रही है कि मुखबिर को कितने में "कहानी" सुनाने के पैसे मिले होंगे।

*क्राइम पार्टनर: "दीपक मद्दा उर्फ दीलिप सिसौदिया"*

गिरफ्तार मिलन गिरी, ठगी के खेल में अकेले नहीं थे। इनके साथ जेल में आराम फरमा रहे "दीपक मद्दा" उर्फ "दीलिप सिसौदिया" का नाम भी जुड़ा है। दोनों मिलकर कल्पतरु गृह निर्माण संस्था के खाते से करोड़ों रुपये ट्रांसफर करने की "क्रिएटिव स्कीम" चला रहे थे। संस्था के नाम पर जनता के सपनों के घर का बजट इन दोनों के बैंक खातों में पहुंच गया।

*इनामी रकम से बचेगी पुलिस की चाय?*

अब बड़ा सवाल यह है कि ₹5,000 का इनाम "दिखावटी" था या सच में पुलिस वालों के चाय-पानी के खर्चे के लिए रखा गया था। जनता को तो उम्मीद थी कि करोड़ों की ठगी करने वालों के लिए कम से कम लाखों का इनाम घोषित होगा, लेकिन पुलिस ने यहां भी "लो बजट" का सहारा लिया।

*जनता का सवाल: कौन है असली गुनहगार?*

मिलन गिरी जैसे शातिर लोगों की गिरफ्तारी से पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन जनता का सवाल यह है कि इन जैसे ठग आखिर कैसे इतने बड़े स्कैम को अंजाम दे पाते हैं? क्या सिस्टम की कमजोरियां, या फिर किसी बड़े "मास्टरमाइंड" की शह?

नोट: फिलहाल, मिलन गिरी पुलिस की गिरफ्त में हैं और उनसे पूछताछ जारी है। उम्मीद है, इस मामले की जांच "4 करोड़ 89 लाख के स्कैम" से ज्यादा गहराई में जाएगी। जनता को अब बस इंतजार है कि अगला इनाम कितना होगा – ₹10,000 या फिर "दो समोसे और एक चाय"?