जबलपुर पुलिस की ऐतिहासिक उपलब्धि: 12 साल बाद ‘गुमशुदा वारंटी’ धर लिया,
ANAM IBRAHIM
7771851163
12साल से क़ानून् की आँखों मे धुलझोंक खुल्ल्मखुल्ला बिख़ौफ़ घूमता ख़लनायक क्या नही था कोई वर्दीधारी उसे पकड़ने लायक??
*BBC OF INDIA.COM*
National News Network
*Input by .......*
Mukesh Singh
Pankaj atulkar
Zafeer khan
Deepak yadav
Hurairah Ibrahim
*जबलपुर/मप्र:Bhopal/Mp*
शहर में अपराधों की बाढ़ और पुलिस की सुस्त रवैये पर जनता पहले ही मायूस थी, कि तभी एक "बड़ी खबर" ने शहरवासियों के चेहरों पर हल्की मुस्कान ला दी। पुलिस ने आखिरकार 12 साल से फरार वारंटी को गिरफ्तार कर लिया! जी हां, पूरे 12 साल बाद जबलपुर पुलिस ने "साहसिक" कदम उठाते हुए वारंटी संतोष अहिरवार को धर दबोचा।
*वारंटी का केस: लूट और हत्या का प्रयास*
संतोष अहिरवार नामक यह "दुर्दांत अपराधी" ग्वारीघाट इलाके का निवासी है, जो थाना पनागर में लूट और हत्या के प्रयास के मामले में 12 वर्षों से फरार था। पुलिस अधीक्षक श्री सम्पत उपाध्याय ने इस गिरफ्तारी को "विशेष उपलब्धि" करार दिया और अपनी टीम को शाबाशी दी।
*पुलिस की कार्रवाई: कछुए की रफ्तार और ताजपोशी की तैयारी*
इस "महान" गिरफ्तारी के लिए क्राईम ब्रांच ने गुप्त सूचना के आधार पर ग्वारीघाट इलाके में दबिश दी और वारंटी को हिरासत में लिया। पुलिस का दावा है कि इस मामले में थाना प्रभारी और क्राईम ब्रांच की "टीम वर्क" ने अद्वितीय भूमिका निभाई।
*व्यंग्यपूर्ण नजरिया*
अब सवाल यह उठता है कि जबलपुर पुलिस को 12 साल लगे एक वारंटी को पकड़ने में, तो बाकी के "गुमशुदा अपराधी" कब पकड़े जाएंगे? या फिर पुलिस को एक और दशक चाहिए? जनता का कहना है कि अपराधियों को पकड़ने की यह "धीमी रफ्तार" ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है।
*क्या वाकई काबिल-ए-तारीफ?*
सोचने वाली बात यह है कि जब शहर में हर गली-चौराहे पर अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं, तब पुलिस एक पुराने वारंटी की गिरफ्तारी को अपनी "जीत की ट्रॉफी" मानकर गिनती की प्रेसनोट जारी कर रही है। जनता इसे पुलिस की "दिखावटी वाहवाही" बता रही है, जो वास्तविक अपराध नियंत्रण से कोसों दूर है।
*निष्कर्ष:*
जबलपुर पुलिस की यह "कहानी" हमें समझाती है कि हमारे शहर में अपराधियों का हौसला बुलंद क्यों रहता है। क्योंकि जब तक अपराधी 12-15 साल "मुफ्त की छुट्टी" नहीं मना लेते, पुलिस उनके पीछे पड़ने की जहमत नहीं उठाती।
admin