छिंगली कटाकर शहीदो मे नाम दर्ज या Ps गांधी नगर सच मे बन गया हीरो?

छिंगली कटाकर शहीदो मे नाम दर्ज या Ps गांधी नगर सच मे बन गया हीरो?

*छिंगली कटाकर शहीदो मे नाम दर्ज या Ps गांधी नगर सच मे बन गया हीरो?*

Anam Ibrahim 

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```जुआ,सट्टा व ढाबो पर बिकती आवेध शराब भू माफियाओं का कब्जाधारी जाल उस पर मारधाड़ बलात्कार थोकब्न्द अंधे अनसुलझे मामले खुलासे के 

मोहताज़ उस पर इलाके मे फरियादियों की बढ़ती तादात सुनवाई न होने पर पीड़ित फरियादि ACP से लेकर DGP दफ्तर के काट रहे चककर ऐसे मे थाना गांधी नगर को 1 घंटे मे सफलता मिलना बड़ा सवाल```

 *BBC OF INDIA .COM*

National News Network 

Input by

- Mukesh singh

- Zafeer Khan 

- Azam Lala 

- Deepak yadav

- Pankaj atulkar   

*Bhopal/Mp:* भोपाल की राजधानी में दिन-ब-दिन नाबालिगों के गायब होने की घटनाएं आम होती जा रही हैं। एक तरफ बच्चे गायब हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ जुआ, सट्टा और शराब का अवैध कारोबार बेधड़क चल रहा है। लेकिन आज, एक घंटे में एक बच्चे को ढूंढकर गांधी नगर थाने ने ऐसा दिखाया जैसे भोपाल पुलिस ने “मिशन इम्पॉसिबल” पूरी कर ली हो!

*प्रेस नोट का दावा और असलियत की कहानी*

थाने की प्रेस नोट पढ़ने पर ऐसा लगता है जैसे पुलिस ने कोई 'पठान' स्टाइल का ऑपरेशन किया हो। एक नाबालिग, जो बाजार घूमते हुए गायब हुआ, उसे एक घंटे में बस स्टैंड से सकुशल ढूंढ लिया गया। इसके लिए पूरी टीम ने जैसे कोई “सीआईडी” का एपिसोड शूट कर डाला हो।

*लेकिन सवाल ये है...*

गांधी नगर इलाके में खुलेआम जुआ, सट्टा और शराब का धंधा चल रहा है। इन पर कार्रवाई कब होगी?

हर रोज नाबालिगों के गायब होने की खबरें आती हैं, लेकिन दस्तयाबी सिर्फ गिने-चुने मामलों में ही क्यों होती है?

क्या पुलिस सिर्फ प्रेस नोट और वाहवाही के लिए काम कर रही है या असली मुद्दों पर ध्यान दे रही है?

*गांधी नगर का रहस्य:*

भोपाल के गांधी नगर में जुआ और सट्टे का खेल तो ऐसा चलता है जैसे ये किसी लोकल फिल्म का शूटिंग स्पॉट हो। शराब के ठेके ऐसे सजते हैं जैसे मोहल्ले का त्योहार हो। और जब कोई बच्चा गायब हो जाता है, तो प्रेस नोट जारी करके उसे ‘मिल गया’ का तमगा दे दिया जाता है।

*आखिरी सवाल:*

भोपाल के लोगों को पुलिस से उम्मीद तो है, लेकिन सवाल ये है कि क्या ये उम्मीद 'जुए' की तरह है—कि कब कौन-सा केस सुलझ जाएगा, ये किसी को नहीं पता।

आखिर, गांधी नगर की पुलिस को अपने सुपरहीरो मोड से निकलकर असलियत में इलाके की सूरत बदलने की जरूरत है। वरना ये “बच्चा मिला” वाली कहानियां एक दिन खुद मजाक बनकर रह जाएंगी।