10 हजार के इनामी ठग की गिरफ्तारी से उठा पर्दा, पुलिस ने अजमेर से दबोचा*

10 हजार के इनामी ठग की गिरफ्तारी से उठा पर्दा, पुलिस ने अजमेर से दबोचा*

ANAM IBRAHIM 

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*BBC OF INDIA .COM* 

News Network 

Input by 

मुकेश सिंह 

ज़फीर खान 

दीपक यादव 

*इंदौर/मप्र:* 

इंदौर। प्लॉट के नाम पर धोखाधड़ी कर फरार हुआ 10 हजार रुपए का इनामी बदमाश आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया। आरोपी, कृष्णकांत गोयल (उम्र 54 वर्ष), जो पिछले दो सालों से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था, को कनाडिया थाना पुलिस ने राजस्थान पुलिस के सहयोग से अजमेर में धर दबोचा।

*ठगी का खेल और आरोपी की फरारी का सफर*

आरोपी कृष्णकांत गोयल ने इंदौर के प्रेसिडेंट प्लाजा में अपने दफ्तर से प्लॉट बेचने के नाम पर भोले-भाले नागरिकों को ठगने की साजिश रची। फरियादी ज्योति शुक्ला, सत्यनारायण चौहान और गोपालकृष्ण भार्गव ने शिकायत की कि न तो उन्हें प्लॉट का कब्जा दिया गया और न ही उनकी जमा रकम लौटाई गई। इसके आधार पर कनाडिया पुलिस ने वर्ष 2022 में आरोपी के खिलाफ धारा 420 भादवि के तहत मामला दर्ज किया।

जैसे ही गोयल को केस दर्ज होने की खबर मिली, उसने न केवल अपना दफ्तर बल्कि निवास स्थान भी छोड़ दिया और फरार हो गया। उसने कभी इंदौर तो कभी नीमच, उदयपुर और अजमेर में पनाह ली, ताकि पुलिस उसे पकड़ न सके।

*पुलिस की मुस्तैदी और गिरफ्तारी का ऑपरेशन*

आरोपी की गिरफ्तारी के लिए इंदौर पुलिस आयुक्त संतोष सिंह और अतिरिक्त आयुक्त अमित सिंह के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया। कनाडिया थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में टीम ने आरोपी के छिपने के ठिकानों पर लगातार दबिश दी।

आखिरकार पुलिस को खबर मिली कि कृष्णकांत अजमेर के एक मंदिर के पास मौजूद है। टीम ने राजस्थान पुलिस की मदद से मंदिर के बाहर घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में गोयल ने अपने अपराध कबूल कर लिए, जिसके बाद उसे न्यायालय के आदेश से जेल भेज दिया गया।

*पिछले अपराध और वारंट का खेल*

कृष्णकांत गोयल के खिलाफ धारा 138 एनआई एक्ट के तहत भी स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी था। इतना ही नहीं, वह पहले भी धोखाधड़ी के मामलों में गिरफ्तार हो चुका था। पुलिस द्वारा उसकी संपत्तियों और बैंक खातों की भी जांच की जा रही है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।

*पुलिस टीम की शानदार भूमिका*

इस ऑपरेशन में थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सिसोदिया, एसआई सचिन, एएसआई मुकाम सिंह डावर, प्रधान आरक्षक भरत बड़े, अनिल ओझा और प्रमोद जाट ने सराहनीय योगदान दिया।

*क्राइम जगत की बड़ी खबर!*

इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी से इंदौर पुलिस ने साबित कर दिया है कि कोई भी अपराधी कानून से बड़ा नहीं होता। अब देखना यह है कि इस मामले में और कौन-कौन से नए खुलासे होते हैं।