सुसंस्कारिता की चादर मे छेद उतरते ही 7 साल से फरार हत्यारा हुआ हिरासत मे !
Anam Ibrahim
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शैतान के शरीर से सुसंस्कारिता की चादर जैसे ही सरकी तो 7 साल से फरार कुख्यात हत्यारा बेलीबास हो गया ......```
*BBC OF INDIA. COM*
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*Jabalpur/Mp:*
जबलपुर में एक दिल दहला देने वाला खेल खत्म हुआ है। सात साल से फरार एक हत्यारा, जो मानो पुलिस की नजरों से गायब था, आखिरकार पकड़ लिया गया है। ये कोई आम गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक पूरी फिल्मी कहानी जैसा घटनाक्रम है, जो अब तक किसी ने नहीं देखी थी। क्राइम ब्रांच की टीम ने एक जादुई घड़ी की तरह काम किया, और जरा सी लापरवाही नहीं की।
प्रेसनोट के मुताबिक, पुलिस अधीक्षक श्री सम्पत उपाध्याय ने जिले के हर एक थाने को यह आदेश दिया था कि वे हर लंबित वारंट को प्राथमिकता से निपटाएं। आदेश आया तो पूरे जिले में हलचल मच गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री समर वर्मा ने अपनी टीम को जैसे आदेश दिया हो, मानो उन्हें धरती पर किसी भगवान की तलाश हो।
अब इस खेल का सबसे दिलचस्प हिस्सा है—गगन वंशकार नामक वह युवक, जिसने सात साल से हत्यारी दुनिया में कदम रखा था। गगन, जिनकी उम्र 27 वर्ष है और जो सिद्धबाबा के रहने वाले हैं, सात साल से फरार थे। न मास्क, न पहचान छिपाने का कोई तरीका, बस एक खुला वारंटी जो हर दिन उनके लिए एक नई परेशानी बनता गया। पर ये बहुत देर तक छिप नहीं पाया।
खबरें बताती हैं कि क्राइम ब्रांच की टीम को एक विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि वह शख्स, जो कानून के शिकंजे से बचने के लिए दिनों-दिन छुपता फिर रहा था, अब बेशक पकड़ में आ गया है। मुखबिर की सूचना पर क्राइम ब्रांच की टीम ने पुल नंबर तीन के पास गगन वंशकार को दबोच लिया, जैसे किसी ने बड़ा शिकार पकड़ा हो।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। दरअसल, गगन वंशकार के खिलाफ एक और वारंट था, जो थाना घमापुर से जारी हुआ था। जैसे ही इस बात की सूचना थाना घमापुर को दी गई, गगन को दोनों वारंटों में गिरफ्तारी के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
यह पूरी प्रक्रिया एक नज़र में मजाकिया भी लग सकती है, जैसे कोई लंबी कहानी जिसमें एक नायक और खलनायक का सामना हो, लेकिन हकीकत में यह जबलपुर पुलिस का शानदार उदाहरण है कि किस तरह से वे किसी भी अपराधी को पकड़ने में कोई कमी नहीं छोड़ते।
अब यह सवाल उठता है कि गगन के जैसे और कितने ऐसे आरोपी होंगे, जो कानून से खिलवाड़ करते हुए छुपते फिर रहे हैं, और कभी न कभी सामने आकर पुलिस की गिरफ्त में आएंगे? क्या यह असलियत नहीं है कि जब तक किसी के लिए समय ठहरा नहीं है, तब तक कोई भी अपराधी पूरी दुनिया की सुरक्षा को चुनौती दे सकता है?
सवाल तो फिर वही है – कानून का डर किसे है?
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