वृद्ध की हत्या: अमनपसंद जबलपुर के दामन पर खून का दाग*
Anam Ibrahim
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*BBC OF INDIA. COM*
ख़बरों का मरकज़
- Mukesh
- Zafeer
- पंकज अतुलकर
*Jabalpur/MP:*
थाना माढ़ोताल क्षेत्र के करमेता इलाके में हुई 73 वर्षीय वृद्ध संतोष चौबे की निर्मम हत्या ने शहर की रूह को हिला कर रख दिया। जिस तरह इस वारदात को अंजाम दिया गया, वह इंसानियत के चेहरे पर एक बदनुमा धब्बा साबित हुई। इस घटना ने ना केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए बल्कि समाज में पनप रही हैवानियत को भी उजागर कर दिया।
*गुनाह का खूनी मंज़र:*
करमेता के शांत इलाक़े में 14 दिसंबर की रात जब संतोष चौबे अपने घर में आराम कर रहे थे, तब वह इस बात से बेखबर थे कि उनकी जिंदगी का ये आखिरी दिन होगा। 15 दिसंबर की सुबह जब उनके किरायेदार ने खून से लथपथ लाश देखी, तो पुलिस और प्रशासन हरकत में आया। मौके पर एफएसएल टीम, डॉग स्क्वाड और आला अफसर पहुंच गए। पीएम रिपोर्ट ने पुष्टि की कि उनकी मौत गर्दन पर धारदार हथियार से वार करने के कारण हुई थी।
*युवाओं का खतरनाक गिरोह:*
हत्या की गुत्थी सुलझाने में पुलिस ने 200 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और अंततः पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों में 17 वर्षीय नाबालिग भी शामिल है। ये गिरोह दिनदहाड़े रैकी करता था और रात को वारदात को अंजाम देता था।
गिरफ्तार आरोपी हैं:
सतीष कोरी (18)
शिवा कोल (20)
राजन कोल (18)
शेख सोहेल (21)
एक 17 वर्षीय नाबालिग
*हैरान कर देने वाली साजिश:*
हत्या का कारण था पैसे की लालच और गुस्सा। आरोपियों ने 10-12 लाख रुपये के लिए यह खतरनाक साजिश रची। किरायेदार बनकर उन्होंने वृद्ध के घर की जानकारी जुटाई। जब संतोष चौबे ने उनके तात्कालिक कमरा लेने की ज़िद को मना किया और विवाद बढ़ा, तो सतीष कोरी ने अपने पास रखी चाकू से उनकी गर्दन पर वार कर दिया।
*न्यायिक प्रक्रिया और सवाल:*
पुलिस की तत्परता से आरोपियों को पकड़कर जेल भेज दिया गया, लेकिन यह घटना जबलपुर की "तहज़ीब" पर सवाल खड़ा करती है। आखिर किस तरफ जा रहा है हमारा युवा? क्यों हमारे शहर के मासूम चेहरे खून-खराबे में लिप्त हो रहे हैं?
*पुलिस की भूमिका:*
इस गुनाह को सुलझाने में थाना प्रभारी माढ़ोताल विपिन ताम्रकार और उनकी टीम ने उल्लेखनीय कार्य किया। लेकिन यह भी ध्यान देने की ज़रूरत है कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए समाज और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा।
*नतीजा:*
जबलपुर जैसे शहर में इस तरह की घटनाएं सिर्फ कानून का ही नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने का भी मज़ाक उड़ाती हैं। आज जरूरत है कि हम अपनी सोच बदलें और उन कारणों पर काम करें, जो हमारे समाज को इस अंधकार की ओर ले जा रहे हैं।
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