सोना बचा, इंसान लहूलुहान हुआ: जबलपुर Ps पनागर की गली में ज़ुर्म की जीत और क़ानून की देर से दस्तक

सोना बचा, इंसान लहूलुहान हुआ: जबलपुर Ps पनागर की गली में ज़ुर्म की जीत और क़ानून की देर से दस्तक

Anam Ibrahim

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थैलों में ज़ेवर, रास्ते में लाश का इरादा: थाना पनागर लूटकांड का यह कैसा नंगा सच... 

जी हां दोस्तों ज़िन्दगी ने हमें यह भी सिखाया है की हमारी खामियों से ज़्यादा हमारी खूबियों की वज़ह से हमें न पसंद किया जाता रहा है वैसे टकटकी लगाए ख़बर की कब्र तैयार करते हें 

थाना पनागर की गली में बंदूक, हथौड़ा और ज़ेवरात जब सोना लहू से बोला और क़ानून ने तस्बीह गिन्नी सुरू कर दी फिर क़्या था ज़ुर्म कामयाब, इंसाफ़ ज़ख़्मी करते हुए लूटकांड की स्याह शाम अचानक आ दस्तक देती है 

और कहती है की यह लूट माल की नहीं हुई बल्कि हिम्मत की हुई है खैर इस एक शाम का काला हिसाब तो काले शब्दों से लिखा जा सकता है 

ज़ेवरात, की लूट जिश्म के ज़ख़्म और जंगल तक का सफ़र सच 

बंदूक के आगे क़ानून नहीं, इंसान था: पनागर की गली से जंगल तक फैलें ज़ुर्म की दास्था और फिर से गुज़रा जेवरात के लूटकांड का मुक़म्मल किस्सा सिर्फ़ एक क्लिक मे 

पनागर लूट में तीस लाख की बरामदगी

जहां कट्टा चला, हथौड़ा बोला, गली गवाही देती रही फिर खुद खौफज़दा हो गली भी बंद दरवाजों से खुलने की पुकार कर छुपने की मिन्नते करने लगी : पनागर में तीस लाख का अपराध

*जनसम्पर्क Life*

पनागर की तंग गली में उस शाम अँधेरा सिर्फ़ सूरज ढलने से नहीं उतरा था, बल्कि इंसान के अंदर छुपे वहशीपन ने भी रोशनी का गला घोंट दिया था। सोने चाँदी की झनकार, जो आमतौर पर शगुन और शादी-ब्याह की ज़बान बोलती है, यहाँ गोलियों, हथौड़ों और गालियों के बीच कराहती पाई गई।

16 दिसंबर की शाम, भूरा ज्वेलर्स के मालिक सुनील उर्फ़ भूरा सोनी अपने बेटे और भतीजे के साथ दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। ओला स्कूटर पर लदे चार थैले जिनमें सिर्फ़ जेवर नहीं, बल्कि पीढ़ियों की मेहनत, भरोसा और नींदें रखी थीं पनागर की एक गली में क़िस्मत से टकरा गए।

तीन मोटरसाइकिलों पर सवार छह साए आए। कट्टे की नोक, हथौड़े की मार और वहशी हौसलों ने कुछ ही लम्हों में गली को अदालत बना दिया जहाँ फ़ैसला पहले से लिखा था और इंसाफ़ को गवाह तक नहीं बनाया गया।